जब तक मैं जानता हूं, मैं कौन हूं, मुझे कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है

01 अक्टूबर, 2018
जो लोग हमें प्यार करते हैं, वे जानते हैं, हम कौन हैं। आपको उनके आगे कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है। वे हमारी सीमाओं से वाकिफ हैं और जानते हैं, जहाँ हमारे अधिकार शुरू होते हैं वहां उनके समाप्त होते हैं।

स्वीकृति या मान्यता पाने के लिए दूसरों के आगे कुछ साबित करने की जरूरत हमारे लिए बेवजह स्ट्रेस का कारण बनती है।

यदि आप इसके बारे में सोचते हैं और एक पल के लिए छानबीन करते हैं, तो आपको पता चलेगा, यह ऐसा कुछ है जो आप अक्सर करते हैं। उदाहरण के लिए, अपने परिवार या दोस्तों के आगे अपना प्यार साबित करने के लिए आप ऐसे काम करते हैं जो आप वास्तव में नहीं करना चाहते।

बेशक, यदि आप किसी के साथ हिल-मिलकर रहना चाहते हैं तो कभी-कभी संबंधों को मजबूत करने के लिए कुछ चीजों को करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होता है। समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए भी ऐसा करना पड़ता है।

लेकिन इसकी सीमाएं होती हैं। ये सीमाएं आपके अपने मूल्य हैं और खासकर आपकी व्यक्तिगत गरिमा।

जब भी आप इन मूल्यों से भटक जाते हैं और खुद को उन चीजों को साबित करने के लिए बाध्य पाते हैं जो आपके लिए प्रामाणिक नहीं हैं तो आप अपनी पहचान खोने या डिप्रेशन से पीड़ित होने का खतरा मोल लेते हैं।

आइए इस पर नज़र डालें।

खरा बने रहना आज़ाद और सलामत रहने का तरीका है

कभी-कभी “नहीं” कहने से किसी को चोट पहुंचाने या किसी प्यार करने वाले को निराश करने का डर होता है। लेकिन इसके बावजूद, यह शब्द अनगिनत दरवाजे और अवसरों को खोलने के काबिल है।

इसका कारण यह है, जब सही समय पर “नहीं” कहा जाता है  तो कभी-कभी इसका मतलब “हाँ” होता है। आइए एक साधारण उदाहरण के बारे में सोचें। आपकी एक बहुत ही जटिल साथी के साथ नजदीकी दोस्ती है और भले ही आप दोनों के बीच प्यार है, आपको आंसुओं और मायूसी के सिवाय कुछ नहीं मिलता है।

ठीक समय पर “नहीं” कहना – हालांकि यह मुश्किल और कठिन है – खुद को फिर से शुरू करने का अवसर देना और एक-दूसरे को चोट पहुंचाना बंद करना है। लेकिन यदि आप उसी रास्ते पर चलते रहते हैं तो आप खुद को अपने आप से दूर करते हैं और बेकार में दुःख दर्द भुगतते हैं।

यह दिखाने की हिम्मत कि आप कौन हैं और आप क्या चाहते हैं

यह दिखाना कि आप कौन हैं और आप क्या चाहते हैं दुनिया में जीने की एक बहुत जरूरी तकनीक है। यह अपने क्षेत्र को मार्क करने जैसा है। यह दूसरे लोगों को बता देता है कि वे कितनी दूर तक जा सकते हैं और यदि वे उन रेखाओं को पार करते हैं तो उन्हें किस चीज का सामना करना पड़ेगा।

  • शुरू में ही स्पष्ट कर दें कि आपके मूल्य क्या हैं और आप क्या बर्दाश्त करने के लिए तैयार हैं। यह पक्का कर लें कि उन्हें मालूम हो, कौन सी जानकारी जरूरी नहीं है। इससे चीजें आसान हो जाती हैं और बेशक साथ रहना भी सरल हो जाता है।
  • जो लोग कभी भी अपनी सीमाओं को सेट नहीं करते हैं, वे दूसरों के लिए उन रेखाओं को पार करने का रास्ता खोल देते हैं और उनको हमेशा थोड़ा ज्यादा मांगने का अवसर देते हैं। ऐसे में लोग आशा करते हैं, आप उनके लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे और वे आपके अधिकारों या जरूरतों का सम्मान नहीं करेंगे।
  • यह इसे अहंकार के लेंस के माध्यम से देखने, खुद को दुनिया से अलग करने से दूर है। आपको इसे “आप कौन हैं इसकी खुशी मनाने” के रूप में देखना चाहिए।

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जैसे ही आपको यह साफ-साफ मालूम हो जायेगा कि आप कौन हैं, आप क्या चाहते हैं और आप किस बात की अनुमति देने के लिए राज़ी नहीं हैं, आपको मन की शांति और सुकून महसूस होगा और आप दूसरों के साथ ज्यादा अच्छी तालमेल से रहेंगे। आपको कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आप पूरी तरह से इस बात से अवगत होंगे कि दूसरों को भी प्रामाणिक, सहज और अपनी वास्तविकता में रहने का अधिकार है।

किसी को भी ऐसा दिखने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए जो वह नहीं है।

मैं जानता हूं, मैं कौन हूं और मुझे कुछ भी साबित करनी की जरूरत नहीं है

अनिश्चितता, असुरक्षा और आत्म सम्मान की कमी की वजह से आप अच्छा महसूस करने के लिए हमेशा बाहरी स्वीकृति की खोज में रहेंगे। यह सही नहीं है।

जो लोग दूसरों से स्वीकृति पाने की खोज में रहते हैं वे बहुत ही खतरनाक दुःख के चक्कर में फंस जाते हैं। ये वे लोग हैं जो हमेशा अपने सहयोगियों को खुश करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि “यह एकमात्र तरीका है” जिससे उन्हें अच्छा महसूस होता है।

  • ये लोग अपने परिवार के सदस्यों को नहीं कहने में असमर्थ होते हैं, भले ही यह उनके वसूलों के खिलाफ हो। वे किसी भी और चीज से ज्यादा उनको निराश करने से डरते हैं, या उनके माता-पिता के मन में जो उनकी छवि है उससे अलग कोई और छवि पेश नहीं करना चाहते हैं।
  • यह सब आपको आत्मविश्वास की कमी के गड्ढे में गिरा सकता है जो आपको पॉजिटिव, मजबूत और प्रामाणिक आत्म-छवि रखने से रोकता है। आपका ध्यान इतना ज्यादा बाहर केंद्रित होता है कि आप स्वयं को सुनना बंद कर देते हैं। जो लोग खुद को नहीं सुनते हैं वे अपनी देखभाल करना बंद कर देते हैं और भटक जाते हैं।

आप कह सकते हैं, जीवन सबसे ज्यादा अपने को फिर से खोजने की प्रक्रिया है। एक बार जब आप “आंतरिक कनेक्शन” प्राप्त कर लेते हैं तो आप दूसरों के साथ ज्यादा संतोषजनक संबंध स्थापित कर पाते हैं।

ऐसे समय पर आप दूसरों को स्वंतंत्र रूप से जानना शुरू करते हैं। आप हर व्यक्ति के अधिकारों और सामूहिक परियोजनायें बनाने के जादू से वाकिफ होते हैं। आपको स्वतंत्रता के साथ गहरी एकता का भी एहसास होता है।

यह निश्चित रूप से कोई आसान काम नहीं है। लेकिन एक ऐसी स्थिति, जहाँ आपको आप जो नहीं हैं या जैसा आपको सच में महसूस नहीं होता है वैसा दिखाई देना बंद करने के लिए जरूरी संतुलन प्राप्त होता है, तक पहुँचने के लिए यह करने योग्य है।

“नहीं,” कहने की हिम्मत और यह जानना कि आपको कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है, हमेशा स्वतंत्रता देता है।

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