विनम्रता की अद्भुत अहमियत

05 अक्टूबर, 2018
आपको यह जानकारी होनी चाहिए, आपका जीवन दूसरे व्यक्तियों से प्रतिस्पर्धा नहीं है। जहाँ तक इसका आपकी पहचान से संबंध है, आपको अपना सबसे बेस्ट वर्जन होने का प्रयास करना चाहिए।
 

अनगिनत पुस्तकें और सेल्फ-हेल्प गुरु हमें विनम्रता का महत्व सिखाने और यह प्रयत्न करने के लिए समर्पित हैं कि हम बेहतर व्यक्ति कैसे बनें। वे हमें आत्म-चेतना, आंतरिक ध्यान और बेहतर आत्मसम्मान की प्रैक्टिस करने की सलाह देते हैं।

इसका एक अन्य पहलू भी है जिसे आपको कभी नहीं भूलना चाहिए – बेहतर व्यक्ति होने पर भी आपको कभी भी यह सोचने की अनुमति नहीं होनी चाहिए कि आप दूसरों से बेहतर हैं। अपनी एकमात्र कसौटी आप खुद हैं।

निश्चित रूप से आप कुछ ऐसे व्यक्तियों को जानते हैं जिनकी प्रवृत्ति, आचरण और दूसरों से बातचीत करने का तरीका हूबहू दर्शाता है कि वे यह मानने की असुविधाजनक अवस्था में हैं कि वे दूसरों से बेहतर हैं।

आज हम विनम्रता के महत्व पर कुछ अधिक चिंतन करने के लिए आपको निमंत्रित करते हैं।

जब आप दूसरों से बेहतर होने की अपेक्षा नहीं करते, यह आपको अधिकांश लोगों से बेहतर बनाता है

आजकल एक अजीब दौर लोकप्रिय होता जा रहा है। इसे एक्सपर्ट “आध्यात्मिक भौतिकवाद” (spiritual materialism) कहते हैं। यह आत्म-चेतना के ऊँचे स्तर तक पहुँचने में रुचि का उल्लेख करता है।

यही वह जगह है, जहाँ हम बाकी लोगों से अपने आप को अलग पाते हैं।

अपने-आप को समझने की खोज में अपने आत्मसम्मान की सुध लेने के लिए और प्रतिदिन अधिक मजबूत और बेहतर बनने के लिए कुछ व्यक्ति उन अवधारणाओं को गलत समझेंगे और गलत चीज पर ध्यान केंद्रित करेंगे; अपने आस-पास के लोगों से बेहतर बनने का प्रयास करना।

इसलिए इस अवधारणा की उचित समझ होना ज़रूरी है। अपने आत्मसम्मान को मजबूत बनाने के लिए आप नई रणनीतियाँ विकसित कर सकते हैं, अपने संबंधों को समृद्ध बना सकते हैं और ऊँची चीजें उपलब्ध कर सकते हैं, परंतु दूसरों की क्षति करते हुए और दूसरों से बेहतर दिखने के प्रयास में कभी भी नहीं।

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विनम्रता का महत्व
 

एक विनम्र व्यक्तित्व

जो लोग घमंड से भरे हैं और जिन्हें प्रतियोगिता करने की या बेहतर होने का स्वांग भरनेे की जरूरत रहती है वे अपने घटिया स्वाभिमान को छुपाते हैं।

अपनी बेहतर कुशलता का प्रदर्शन करते हुए और आक्रामक प्रवृत्ति से दूसरों को छोटा दिखाते हुए अपने आप को “ऊँचा” दिखाने की खुशी उनके घटिया स्वाभिमान का पोषण करती है और उसे खराब करती है।

  • आपके सोशल सर्किल में, चाहें काम पर हो या मित्रों और परिवार के बीच, हमेशा कोई न कोई ऐसा व्यक्ति होता है जो अपने आसपास लोगों को नीचा दिखाने के लिए व्यंग या उपहास का प्रयोग करता है। वह दूसरों से भी बेहतर अपनी कुशलताओं और क्षमता का प्रदर्शन करने की कोशिश करता है।
  • यह भी संभव है, आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो इस प्रकार के आचरण के विपरीत है। कभी-कभी आपको कोई ऐसा व्यक्ति भी मिल सकता है जिसे पीड़ित होना पसंद है।
  • वे लोग “सबसे अधिक कष्ट भोगते हैं” और बाकी लोगों से बेहतर समझते हैं कि ठुकराया जाना या सराहना का अभाव क्या होता है।

सबसे बुनियादी स्तर पर, वे सिक्के के दूसरे पहलू हैं: नीचा आत्मसम्मान, जो उन्हें दूसरों से सामना करने में सक्षम होने से रोकता है।

विनम्रता दूसरों पर कोई चीज थोपती नहीं है

विनम्र होने का अर्थ किसी दूसरे से बेहतर होने की चाह या कोशिश करना नहीं है।

आपको दूसरों से प्रतियोगिता करने की या किसी चीज को हासिल करने की आकांक्षा की आवश्यकता नहीं है

  • सबसे बड़ी खुशी अपने आप से प्रतियोगिता करते हुए, अपने में सुधार लाने में, दिन प्रतिदिन बेहतर व्यक्ति बनने और कभी भी दूसरों की कमजोरी का लाभ नहीं उठाने में रहती है।
  • यदि आप अपने काम में कोई चीज हासिल करने, या आप जिससे आकर्षित थे उसकी दृष्टि आकर्षित करने में सक्षम होने के लिए इसे करने में सफल हैं, तब आपने “बेहतर” होने का प्रबंध कर लिया है।
  • यही वह जगह है, जहाँ आपकी महानता वास्तव में रहती है: वह है अपने में सुधार लाने में। जो दिखावे में और महानता की दौड़ में आसक्त हो जाता है वह भूल जाता है कि वह कौन है।
 

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विनम्रता

  • कोई व्यक्ति जो अन्य किसी भी व्यक्ति से अच्छा बनना चाहता है, वह विनम्र नहीं है। विनम्रता एक ऐसी चीज है जिसका प्रयत्न आपको उन सभी चीजों में अपनी सभी गतिविधियों के साथ करना चाहिए जिन्हें आप प्रतिदिन करते हैं। विनम्रता कमजोरी या दूसरों के सामने समर्पण के विपरीत आपकी सबसे बड़ी मजबूती का चिह्न है।
  • इसका कारण है कि यह आपको स्वयं अपनी स्वीकृति देती है।

प्रतिदिन अपने में सुधार लाइए

एक बार जब आप इसे स्वीकार कर लेते हैं, तब आपका कार्य केवल एक व्यक्ति के रूप में विकसित होते रहना और प्रतिदिन बेहतर होते रहना है। उस खुशी को पाने की महत्वाकांक्षा रखिए जो आपको अनोखा बनाने वाली छोटी-छोटी चीजों में रहती है।

आपके बेहतर होने का असर उन पर भी पड़ता है जो आपके आसपास रहते हैं।

अंत में, आप जानते हैं, हमारे बीच के कुछ लोग उन व्यक्तियों के इर्द-गिर्द बने रहना पसंद करते हैं जो अपने गुमान और घमंड में चूर रहते हैं। फिर भी, उन पर नाराज होने या उनके प्रति घृणा से भर जाने के विपरीत आपको यह याद रखना चाहिए, वे इस योग्य नहीं हैं कि उनके लिए नकारात्मक भावनाओं का पोषण किया जाए।

  • आपको उन्हें उसी रूप में स्वीकार करना चाहिए जैसे वे हैं। सच्ची सफलता अभिमान और दूसरों से बेहतर बनने की कोशिश करने से नहीं मिलती।
  • आप जैसे भी हैं उसी रूप में अपने आपको स्वीकार कर लेने से ही आपको सबसे शानदार जीत मिल सकती है। यदि आप उनकी मान्यता और आचरण को साझा नहीं करते, तब भी उनका सम्मान करें।

आपका पुरस्कार अंत में मिलेगा। आप जो हैं इससे आपको अच्छा महसूस होगा।