कोरोनावायरस के बारे में आम मिथ

अप्रैल 1, 2020
कोरोनावायरस के बारे में कई मिथक फैल रहे हैं, ख़ास कर सोशल नेटवर्क के जरिये। दुनिया बहुत गंभीर स्थिति का सामना कर रही है और यह विश्वसनीय स्रोतों से आने वाले तथ्यों पर ध्यान देने या विश्वास करने का वक्त नहीं है।

कोरोनावायरस रोग यानी COVID-19 से जुड़े कई मिथ सामने आए हैं। सोशल नेटवर्क ख़ास कर फेक न्यूज़ से भरे हुए हैं, विशेष रूप से रोग या महामारी के खतरों और उनके संभावित इलाज के बारे में। कोरोनावायरस (Coronavirus) के बारे में ये सभी मिथ नुकसानदेह हैं। क्योंकि वे भ्रामक हैं और आखिरकार लोगों को ऐसे उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं जो रिस्क भरा या बेकार हो सकता है। इसलिए पहली सिफारिश गलतफहमी को रोकने के लिए केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों से ही सलाह लेने की है।

महामारी का परिणाम क्या होगा यह काफी हद तक इसे स्मार्ट तरीके से निपटने की आपकी क्षमता पर निर्भर करेगा। इसे हासिल करने के लिए गुणवत्ता भरी जानकारी लेना और हेल्थ प्रोफेशनल की सिफारिशों पर अमल करना सबसे अच्छा है। नीचे कोरोनोवायरस के बारे में फैले हुए कुछ मिथ हैं जिन्हें रद्द करने की ज़रूरत है।

कोरोनावायरस के बारे में आम मिथ

मिथक: कोरोनावायरस इतिहास की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है

इस बीमारी के व्यापक मीडिया कवरेज के कारण लोग यह मानने लगे हैं कि यह इतिहास की सबसे खतरनाक महामारी है जबकि ऐसा नहीं नहीं है। कोरोनावायरस को खतरनाक बनाने वाला तथ्य दरअसल इसका घातक होना उतना नहीं जितना कि उसका संक्रामक होना है।

एक और फैक्टर जो खतरे की घंटी बजाता है, वह यह तथ्य है कि यह वायरस नया है और इसलिए इसके बारे में कुछ मालूम नहीं है। जैसा कि एक्सपर्ट अभी भी इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं और यह कहना संभव नहीं है कि यह कैसे व्यवहार करेगा। जैसे-जैसे वक्त बीतेगा वे उन आकड़ों की खोज कर सकते हैं जो अभी नहीं मालूम।

फिलहाल WHO के अनुसार इस बीमारी में मृत्यु दर लगभग 3.4% है। इसका मतलब है, संक्रमित हर सौ लोगों में तीन मर जाते हैं। वैसे तो मौत की ओर ले जाने वाली हर बीमारी चिंता का कारण होनी चाहिए, पर इस मामले में सिर्फ कुछ चंद लोग ही इसके घातक नतीजे पाते हैं।

पढ़ते रहिए: Coronavirus Disease (COVID-19) : विशिष्ट लक्षण

कोरोनावायरस के बारे में कई मिथ फैल रहे हैं, जिससे इस महामारी पर काबू पाना कठिन हो जाता है।

मिथ: यह एक आम फ्लू है

इस मामले में दूसरे छोर पर वे भी हैं जो महामारी के खतरों को कम करके आंकते हैं। यह सच है कि बीमारी 80% मामलों में हल्के लक्षणों का कारण बनती है। लेकिन यह भी सच है कि यह एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़ों पर असर डालती जो कि शरीर का अहम अंग हैं।

इसी तरह यह अभी भी साफ़ नहीं है कि वायरस कैसे व्यवहार करता है। एक्सपर्ट लोगों को यकीन नहीं है कि यह बदल सकता है या नहीं। संक्षेप में हम एक ऐसे खतरे का सामना कर रहे हैं जिसे हम अभी पूरी तरह जानते ही नहीं हैं। इस तरह ऐसी स्थिति में सबसे स्मार्ट चीज यही है कि बहुत सतर्क रहा जाए और जोखिम को कम करके नहीं आँका जाए।

जैसा कि हमने पहले ही नोट किया है, यह ख़ास वायरस बहुत संक्रामक है। संक्रमण की तादाद बढ़ने पर मौतों की संख्या भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह जोखिम सबसे कमजोर लोगों तक जा सकता है, जिसमें बहुत छोटे बच्चे, बूढ़े वयस्क और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग हैं।

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COVID-19 घरेलू इलाज और मिथ

कोरोनावायरस के बारे में कई मिथक ऐसे घरेलू इलाज को लेकर हैं जो बीमारी को रोक सकते हैं या ठीक कर सकते हैं। इस संबंध में हमें यह कहना चाहिए कि इस मामले में ऐसे उपायों की प्रभावशीलता को लेकर कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

उदाहरण के लिए यह कहा गया है कि लहसुन इस संक्रमण को रोक सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने माना है कि इस पौधे में कुछ एंटी माइक्रोबियल  गुण तो हैं, पर सच्चाई यह है कि इससे यह साबित नहीं होता है कि यह कोरोनवायरस के खिलाफ असरदार है। यही बात कोलोइडल सिल्वर और “चमत्कारी” मिनरल की डोज के लिए भी सच है।

वर्तमान में कोरोनावायरस के इलाज के लिए कोई दवा नहीं हैं। यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि सेल्फ मेडिकेशन से बचना ज़रूरी है, क्योंकि इससे COVID-19 के लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है और दूसरे हेल्थ रिस्क खड़े हो सकते हैं।

यह एक मिथ है कि लहसुन कोरोनावायरस से लड़ सकता है। इस दावे का समर्थन करने वालं कोई सबूत नहीं है।

COVID-19 को लेकर हाइजीन की बात मिथ नहीं है …

अंत में, यह बाताना ज़रूरी है कि अपने हाथों को बार-बार धोना और एंटीबैक्टीरियल जेल को लगाना संक्रमण के जोखिम को कम करने के प्रमाणित उपाय साबित हुए हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि आपके हाथ धोने से वायरस के होने की संभावना 50% कम हो जाती है। हालांकि सबसे असरदार उपाय दूसरों के साथ संपर्क को कम करने और वायरस के संक्रमण का संदेह होने पर अपने क्वैरेंटाइन करना है।

… पावरफुल डिस इन्फेक्टेंट की जरूरत है

यह सच नहीं है कि संक्रमण से बचने की संभावना बढ़ाने के लिए आपको अपने हाथों पर घरेलू कीटाणुनाशक लगाना होगा। न ही यह सच है कि फेस मास्क वायरस के प्रवेश को रोकते हैं। COVID-19 केवल कुछ ही घंटों के लिए वस्तुओं पर चिपकता है, जिसके कारण इस रूट से संक्रमित होना मुश्किल है।

कई लोगों द्वारा स्पर्श की जाने वाली वस्तुओं को छूने के बाद अपना हाथ धोना उचित होगा।

  • Bonilla-Aldana, D. K., Villamil-Gómez, W. E., Rabaan, A. A., & Rodriguez-Morales, A. J. (2020). Una nueva zoonosis viral de preocupación global: COVID-19, enfermedad por coronavirus 2019. Iatreia, 1(1).
  • Coria-Lorenzo, José de Jesús, et al. “Influenza y los virus aviar: la amenaza latente de un nuevo virus pandémico.” Acta Pediátrica de México 40.3 (2019): 154-165.