6 जोखिम भरी मछलियाँ जिन्हें कभी नहीं खाना चाहिए

जुलाई 24, 2018
कुछ ऐसी मछलियाँ होती हैं जिनमें भारी मात्रा में फैट पाया जाता है। इस फैट के कारण हमारे शरीर में मरकरी इकट्ठा हो जाती है। ऐसी मछलियाँ हमारे लिए बेहद हानिकारक भोजन का रूप ले लेती हैं। 

पूरी दुनिया में मछली को सबसे स्वास्थवर्धक और लज़ीज़ खानों में से एक में गिना जाता है, इसी वजह से मछलियाँ हमारी रेगुलर डाइट का हिस्सा बन जाती हैं।

  • इसमें पाए जाने वाले सभी पोषक तत्व अच्छी सेहत के लिए वरदान साबित होते हैं।
  • शायद यही वजह है कि सभी डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट इसे खाने की सलाह देते हैं।

लेकिन मछली के सेवन के साथ कुछ ऐसे नकारात्मक तथ्य भी जुड़े हैं जिनसे अधिकतर लोग अनजान हैं। इनमें एक है इनमें पारे का मौजूद होना।

पारे और मछली का सम्बन्ध (Mercury and Fish)

हानिकारक मरकरी

पिछले कुछ सालों में किए गए अध्ययन इस बात को साबित करते हैं कि मछलियों में कई भारी धातु (Heavy Metals) पाए जाते हैं।

इनमें मिथाइलमरकरी (एक ऐसा आर्गेनिक कंपाउंड जो मरकरी से निकलता है) सबसे ज्यादा मात्रा में होता है

जब आप ऐसी मछलियों का सेवन करते हैं जिनमें मिथाइलमरकरी (methylmercury) अधिक मात्रा में होता है, तब आपकी सेहत खतरे में पड़ सकती है

लेकिन केवल मरकरी ही ऐसी एकमात्र चीज़ नहीं है जिससे आपकी सेहत को खतरा हो सकता है

इसके अलावा भी मछली में एक बहुत ही नुकसानदेह पदार्थ पाया जाता है।

बता दें, कि हम उस प्रदूषण और उससे जुड़े खतरों के बारे में बात कर रहें हैं जो मछलियों के पर्यावरण से आते हैं

  • प्लास्टिक और तेज़ केमिकल भी मछलियों के दूषित होने का मुख्य कारण बनते हैं। दुख की बात यह है कि खाने की मेज़ पर ऐसी दूषित मछलियाँ ही “स्वस्थ” आहार नज़र आती हैं
  • इसके साथ-साथ, मानवीय शरीर मरकरी जैसे पदार्थों से जुड़ी किसी भी प्रकार की क्रिया को करने में असमर्थ है
  • इस कारण शरीर में इस धातु की मात्रा इतनी बढ़ती जाती है कि हमारा शरीर खतरे में आ जाता है

जोखिम भरी ऐसी मछलियाँ जिनसे परहेज़ करना चाहिए

अब जब हम यह जान चुके हैं कि कुछ ज़हरीली मछलियाँ होती हैं, तब हमें यह भी जान लेना चाहिए कि इनमें किसमें सबसे अधिक मात्रा में मरकरी पायी जाती हैहमने ऐसी ही कुछ खतरनाक मछलियों की जानकारी यहाँ देने की कोशिश की है।

रेड ट्यूना (Red tuna)

रेड ट्यूना मछलियाँ

  • मछली उद्योग जगत में रेड ट्यूना को एक बहुत ही जानी-मानी मछली के रूप में जाना जाता है।
  • इसकी कई अलग अलग वरायटी भी होती है। लेकिन यदि पारे से जुड़े खतरों को ध्यान में रखा जाए, तो इस मछली का नियमित सेवन नहीं करना चाहिए।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ख़ास तौर से इसके सेवन से दूर रहना चाहिए। ज़्यादा से ज़्यादा हमें इस मछली को केवल हफ्ते में एक ही बार खाना चाहिए।

बासा (Basa)

  • बासा दुनिया की सबसे खतरनाक मछलियों में से एक है।
  • इसे वियतनाम से मंगाया जाता है और इसने लोगों के बीच में इतनी प्रसिद्धि इसलिए पाई है कि इसे खाना बहुत ही आसान है।
  • इसमें बिलकुल भी हड्डियाँ नहीं होती हैं। आप इसे बड़ी आसानी से खा सकते हैं।
  • यह एक छोटी सी समुद्री मछली की तरह होती है और बड़ी ही आसानी से आप इसका सेवन एक हड्डी रहित माँस के टुकड़े की तरह कर सकते हैं।
  • यह बड़ी किफ़ायती मछली भी होती है।

लेकिन आसानी से खाने योग्य और किफ़ायती होने जैसी अपनी इन सब खूबियों के बावजूद, यह मछली बहुत ही कम पौष्टिक होती है।

इसमें ओमेगा -3 फैटी एसिड भी बहुत कम मात्रा में पाया जाता है।

बासा, ट्राइफ्लुरिन नाम के कीटनाशक से भी दूषित होती है। यह कीटनाशक आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

डॉगफिश (Dogfish)
डॉग फ़िश

  • यह मछली बड़ी आसानी से आपको स्पैनिश व्यंजनों में मिल जाएगी।
  • कई बार तो इसे स्वोर्डफिश की जगह एक किफ़ायती विकल्प के रूप में इसे इस्तेमाल किया जाता है।
  • लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी इसका ज़रूरत से ज़्यादा बड़ा आकार है।
  • अपने बड़े आकार के कारण ये कैडमियम और मरकरी जैसी धातुओं को इकट्ठी करती चली जाती है।
  • ये दोनों धातु सेहत के लिए कुछ ख़ास फायदेमंद तो होते नहीं हैं। इनसे दूरी बनाए रखना ही बेहतर है।

मैकरेल (Mackerel)

  • कई रेस्टोरेंट्स में मैकरेल नियमित रूप से परोसी जाती है।
  • इसे खाने वालों की तादाद काफी बड़ी है।

लेकिन, कई लोगों के बीच प्रसिद्धि पा चुका एक पसंदीदा भोजन होने के कारण भी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) ने मैकरेल को जोख़िम भरे भोजन की उपाधि दी है।

  • इस मछली के माँस में पारे की मात्रा सबसे अधिक होती है।

इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए मैकरेल के सेवन से ज़्यादा से ज़्यादा परहेज़ करना चाहिए और इसे केवल कभी-कभी ही खाना चाहिए।

तेलापिया (Tilapia)

टिलापिया मछली

  • अगर मैकरेल को आम जनता के बीच पसंद किया जाता है तो तेलापिया भी अपने आपमें कुछ कम नहीं है।
  • अगर व्यापार, उद्योग और खान-पान से जुड़े मापदंडों पर देखें, तो तेलापिया भी काफी प्रसिद्ध मछली है।
  • लेकिन ये इंसानी सेहत के लिए अच्छी नहीं है। आप इस मछली की तुलना सूअर की चर्बी तक से कर सकते हैं।
  • वजह है इसमें बहुत ज़्यादा फैट पाया जाना। इसमें “ख़राब कलेस्टरॉल” (LDL) होता है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आपको टिलापिया को कम से कम खाना चाहिए।

यदि आपको आर्थराइटिस, अस्थमा और दिल से जुडी बीमारियाँ हैं, तब तो आपको इससे बिल्कुल दूर रहना चाहिए।

स्वोर्डफ़िश (Swordfish)

  • अपने बड़े आकार के कारण स्वोर्डफिश अपने आस पास की सभी छोटी मछलियों को खा जाती है।
  • इस वजह से इसमें भरपूर मात्रा में फैट और मरकरी पाए जाते हैं।
  • अपनी इन सीमाओं के चलते, आपको स्वोर्डफिश का सेवन नहीं करना चाहिए और उचित प्रयास कर इनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आज इस विषय पर चर्चा के बाद,  इन मछलियों को खाने से पहले आप आसानी से अपने लिए सही और गलत का निर्णय ले पाएँगे।

Sheet, F. (2006). Mercury and Fish Consumption. Mercury.