पैराफाइमोसिस क्या है?

पैराफाइमोसिस  एक ऐसी स्थिति है जिसमें शिश्न की फोरस्किन ग्लैंज़ के पीछे फंस जाती है और अपनी असली जगह पर वापस नहीं आ पाती। इससे इस अंग में खून का प्रवाह घाट जाता है।
पैराफाइमोसिस क्या है?

आखिरी अपडेट: 27 जुलाई, 2019

पैराफाइमोसिस (Paraphimosis) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शिश्न की ऊपरी चमड़ी का अग्र भाग एक असामान्य स्थिति में आ जाता है। फोरस्किन यानी  शिश्न के ऊपर की चमड़ी का अग्र भाग त्वचा का एक फोल्ड है जो लिंग के सिरे पर फैली हुई इसे ढकी रहती है, जिसे ग्लैंज़ के रूप में भी जाना जाता है।

किसी मरीज को पैराफाइमोसिस होने पर फोरस्किन ग्लैंज़ के पीछे फंस जाती है और अपनी मूल स्थिति में वापस नहीं लौट पाती। यह आपातकालीन मेडिकल स्थिति है, क्योंकि शिश्न का रक्त रक्तप्रवाह मुख्य ब्लड स्ट्रीम में नहीं लौट पाता।

पैराफाइमोसिस को फाइमोसिस समझने की भूल नहीं करना चाहिए। बाद वाली स्थिति अतिरिक्त त्वचा को दर्शाती है जो रिट्रैक्शन में रुकावट डालती है। शिशुओं में फाइमोसिस शारीरिक होता है। हालांकि यह आम तौर पर समय के साथ सामान्य हो जाता है।

पैराफाइमोसिस  (paraphimosis)

पैराफाइमोसिस  (paraphimosis)

यह क्यों होता है?

पैराफाइमोसिस तब होता है जब फोरस्किन लिंग में कम रक्त प्रवाह की ओर ले जाता है।

कई बातें इसका कारण बन सकती हैं :

  • अधूरा विकास (शिशुओं के मामले में)
  • फोर्स्ड फोरस्किन रिट्रैक्शन जो कि एक फाइब्रस धब्बा बनाता है
  • टाइट फोरस्किन
  • अधूरा खतना (circumcision)
  • शिश्न में आघात
  • साफ़-सफ़ाई न होने के कारण संक्रमण या किसी बाहरी वस्तु का प्रवेश।

पैराफाइमोसिस के संकेत और लक्षण क्या हैं?

जाहिर है, चमड़ी को पीछे खींचने में असमर्थता इसका महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसा करने की कोशिश करने पर रोगी दर्द और सूजन का अनुभव करता है। यदि स्थिति कुछ घंटों के लिए बनी रहती है, तो वहाँ खून इकठ्ठा हो जाता है और खून के जमाव से त्वचा फूल जाती है।

यह बहुत ही साफ़ नज़र आने वाला मसला है। इसलिए डॉक्टर अक्सर वक्त रहते इसका इलाज करते हैं। बहुत कम मरीज ही गैंग्रीन वाली एडवांस्ड स्थिति में जाते हों, क्योंकि इससे इतना दर्द होता है कि उससे पहले ही डॉक्टर की शरण लेनी पड़ती है।

डायग्नोसिस बहुत आसान है। बस लिंग की जांच-पड़ताल ही पर्याप्त होगी। किसी दूसरे टेस्ट की ज़रूरत नहीं होने के कारण डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं।

पैराफाइमोसिस का इलाज

इसका इलाज हालात की गंभीरता पर निर्भर करेगा। यदि जल्दी पकड़ लिया जाए तो हाथों के करतब से सूजन वाली चमड़ी के टिशू  में हेरफेर करना मुमकिन हो सकता है।

इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए डॉक्टर पेन किलर देते हैं। आप सूजन वाले क्षेत्र में बर्फ भी लगा सकते हैं। यदि सूजन कम न हो तो कोई एक्सपर्ट एक सही सुई से ख़ास तकनीक से एक तरह का दबाव बनाकर खून की निकासी करा सकता है।

इसके अलावा, फोरस्किन को मुक्त करने के लिए डॉक्टर चमड़ी में कोई चीरा भी लगा सकते हैं। इस प्रक्रिया को “डॉर्सल स्लिट ” कहते हैं। यह फोरस्किन को आज़ाद कर देता है और इसे अपनी सही जगह पर लौटने की सहूलियत देता है।

अगर स्थिति ज्यादा गंभीर है, तो रोगी को सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है। खतना एक सर्जिकल टेकनीक है जिसका उद्देश्य फोरस्किन को काटकर निकाल देना है।

ग्लैंज़ को ढंकने वाली त्वचा को हटा देने से पैराफाइमोसिस दोबारा नहीं हो सकता है। हालांकि, इस मामले में फोरस्किन को मुकम्मल हटा देना सुनिश्चित करना ज़रूरी होता है जिससे सर्जरी के बाद निशान न रहे।

अगर रोगी को संक्रमण है, तो डॉक्टर जितनी जल्दी हो सके एंटीबायोटिक दवायें शुरू कर सकते हैं। संक्रमण के बहुत व्यापक रूप से फैल जाने की सबसे बुरी स्थिति में मवाद को बाहर निकालना होगा और एक एंटीबायोटिक मरहम लगाना होगा। सही समय पर रोग के पकड़े जाने पर इलाज का नतीज़ा शानदार होता है।

अगर आप ऐसी किसी असुविधा से पीड़ित हैं, तो जाँच करवाने के लिए हम जल्द से जल्द इमरजेंसी रूम जाने की सलाह देंगे। इस रोग के मामले में यह सबसे अहम बात है।

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