जापानी बच्चे हमेशा इतनी आज्ञाकारी औलादें क्यों होते हैं?

18 फ़रवरी, 2019
एक जापानी मां अपने बच्चों की समर्पित रूप से देखभाल करती है। इस पेरेंटिंग स्टाइल के परिणामस्वरूप बच्चे मिलनसार होते हैं। वे नियमों का सम्मान करते हैं और उनका व्यवहार अच्छा होता है। इस पोस्ट में इस खास शैली के बारे में और जानें।

जापान वास्तव में एक प्रशंसनीय देश है। अन्य चीजों के अलावा, जापानी बच्चे बहुत आज्ञाकारी होते हैं। वे अच्छी तरह से व्यवहार करते हैं, और विनम्र और विचारशील होते हैं। वे नियमों को सीखते हैं और उनका पालन करते हैं और उनसे जो उम्मीद की जाती है उसके मुताबिक अपने व्यवहार को अनुकूलित करते हैं। बच्चों की परवरिश करने का यह तरीका काफी अद्भुत है।

जापानी माता-पिता को पूरा भरोसा है कि वे अपने बच्चों के सामने जो उदाहरण पेश करेंगे उनके बच्चे उससे उचित व्यवहार सीखेंगे। इस संबंध में, वे अपने को जिम्मेदार महसूस करते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर कैसे निकलते हैं।

आप शायद सोच रहे हैं कि जापानी पेरेंटिंग कैसे बच्चों को ऐसा बनाती है कि वे हमेशा अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हैं। जापानी बच्चों के परवरिश के प्रमुख तत्वों को जानने के लिए पढ़ना जारी रखें। आप देखेंगे कि यह पश्चिमी बच्चों के पालन पोषण के तरीके जिन्हें हम जानते हैं उनसे बहुत अलग हैं।

जापानी बच्चे आज्ञाकारी होते हैं और उनका व्यवहार बहुत अच्छा होता है

केंसास एसोसिएशन फॉर इन्फेंट मेंटल हेल्थ ने “डिसिप्लिन इन अर्ली चाइल्डहुड” नाम की एक विभिन्न समाजों की बच्चों के पालन पोषण की तकनीकों की तुलनात्मक स्टडी प्रकाशित करी जिसके मुताबिक जापानी परिवार अनुराग, सहानुभूति और सामंजस्य को बढ़ावा देते हैं।

इस रिसर्च से पता चला कि जापानी बच्चे कहना मानते हैं और वयस्कों जैसे सामाजिक रूप से व्यवहार करना सीखते हैं। लेकिन घर पर, बच्चे पूरी तरह से अपने माता-पिता (खास तौर से अपनी मां) पर निर्भर होते हैं। वे निर्भरता को हतोत्साहित नहीं करते हैं। इसके विपरीत, वे वास्तव में इसे स्वीकार करते हैं और प्रोत्साहित करते हैं।

जापानी माता-पिता बहुत ज्यादा आत्मीयता के माध्यम से छोटे बच्चे की वह जो चाहता है वह करने की व्यक्तिगत प्रवृत्ति को कम करते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर जापानी बच्चे गुस्से के आवेश में नहीं होते हैं। (हालांकि, हमेशा अपवाद होते हैं।)

जापान में अनुराग

माता-पिता, खास तौर से माताओं का अपने बच्चों के साथ बहुत नजदीकी संबंध होता है। माता-पिता इस निकटता को प्रोत्साहित करते हैं और निर्भरता को बढ़ावा देते हैं। जैसा कि जापान में रिवाज है, माता-पिता बच्चों को तैयार करते हैं और खिलाते हैं। इसके अलावा, वे 6 साल की उम्र तक बच्चों के साथ सोते हैं।

मां और बच्चे के बीच इंटिमेट संबंध होता है। वे व्यावहारिक रूप से एक इकाई बनाते हैं और दो अलग और स्वतंत्र व्यक्ति होने के बजाय “अपने विचारों को शेयर करते हैं”। एक बच्चे के जीवन के पहले तीन वर्षों के दौरान, उसकी मां उसे अपने साथ हर जगह ले जाती है।

जापान में, मां वास्तव में अपने बच्चों को समर्पित होती है। एक जापानी बच्चे के लिए तीन साल की उम्र से पहले एक डे केयर या प्रीस्कूल जाने की संभावना नहीं है। इस उम्र में औपचारिक स्कूल की शिक्षा शुरू होती है।

जापानी बच्चों की परवरिश करने की तकनीकें

कई जापानी माता-पिता का मानना ​​है कि उनके बच्चे इसलिए अच्छी तरह से व्यवहार करते हैं क्योंकि उनका बच्चों का पालन पोषण करने का तरीका उनकी दार्शनिक मान्यताओं पर आधारित है: कन्फ्यूशियनिज्म।

यह बच्चों को पालने का तरीका बच्चों को दयालुता के साथ शिक्षित करने के कन्फ्यूशियन आदर्श से उपजा है। आखिरकार, यह गुण आंतरिक शांति और खुशी पैदा करता है।

इस सिद्धांत के आधार पर ये जापानी बच्चों के पालन पोषण के कुछ मौलिक अंग हैं:

सुझाव की ताकत

सबसे पहले, एक जापानी मां अनुशासन के लिए प्रोत्साहन, सुझाव, और कभी-कभी शर्म का उपयोग करती है। इस तरह, वह अपने छोटे बच्चे के साथ सीधे टकराव से बचती है। यह अपने आप ही बच्चे के विद्रोही या आक्रामक दृष्टिकोण को कम करता है।

इसके अलावा, एक जापानी मां अपने बच्चों को यह बताने के लिए कि उन्हें क्या करना चाहिए सुझाव का उपयोग करती है। यह कहने के बजाय, “अपने खिलौनों को उठाओ!”, वह कहती है, “अब आपको अपने खिलौनों के साथ क्या करना है?” इस तरह बच्चे को सही उत्तर निर्धारित करना चाहिए और उसका पालन करना चाहिए। लेकिन अगर बच्चा ये करने के लिए तैयार नहीं है और ऐसे बनता है जैसे कि उसने सवाल या सुझाव को नहीं सुना है तो उसकी मां सूक्ष्म मजाक का सहारा ले सकती है। फिर बच्चा शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय आज्ञा का पालन करेगा।

हाव-भाव की ताकत

एक जापानी बच्चे का अपनी मां के प्रति इतना अनुराग होता है कि वह अपनी मां की भावनाओं और हाव-भाव से भी अवगत होता है। वह अपनी मां की सामंजस्य की स्थिति को भी जानता है। इसलिए एक बच्चा उस सामंजस्य को बाधित न करने के लिए जो कुछ भी करने के काबिल है वह करेगा।

जब मां कोई सुझाव देती है तो उसके चेहरे पर भी एक एक्सप्रेशन होता है जो बच्चे को बताता है कि अगर वह उसका कहना नहीं मानेगा तो वह आश्चर्यचकित होगी।

लेकिन मां बच्चे को दंडित नहीं करती है और न ही उसे सीधे डांटती है। वह फिर से बच्चे को अपने चेहरे के एक्सप्रेशन से बताती है कि वह निराश है। बच्चा अपनी मां के साथ सामंजस्य कायम रखने के लिए सच में उत्सुक होता है इसलिए वह टकराव से दूर रहता है और वह करता है जिसकी उससे उम्मीद की जाती है।

समझना और प्यार: जापानी बच्चे कहना मानते हैं

इसके अलावा, एक जापानी मां ने अपने बच्चों के मूड को समझना भी सीखा है। जब भी ज़रूरत होती है वह अपनी प्रोत्साहन की तकनीक को बदलने के लिए इस कौशल का उपयोग करती है।

अगर वह देखती है कि बच्चा एक अनुरोध को पूरा करने के मूड में नहीं है तो वह उस समय अनुरोध न करने की पूरी कोशिश करेगी। मुमकिन है कि वह बाद में अनुरोध करे।

अगर बच्चा अपने खिलौने उठाने से इंकार करता है तो मां विनम्र रिआयत का उपयोग करेगी। वह कहेगी कि बच्चा तैयार नहीं है या ऐसा करने के लिए पर्याप्त रूप से विकसित नहीं है, या शायद वह बहुत थका हुआ है या बस खेलते रहना चाहता है।

बहुत से जापानी माता-पिता अपने बच्चों को प्यार, मूल्यवान और सम्मानित महसूस कराने के लिए जो भी करना चाहिए वह करते हैं। वे धैर्य, दयालुता, और करुणा का अवतार हैं। यह पेरेंटिंग स्टाइल पश्चिमी माताओं के लिए निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है।

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