दुनिया के साथ कैंसर का टीका साझा करेगा क्यूबा

21 मई, 2018
क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विकसित हो रहे नए संबंधों का एक बड़ा लाभ दुनिया को फेफड़े के कैंसर के नए टीके के रूप में मिलेगा। इस टीके का विकास और परीक्षण क्यूबा के डॉक्टर कर चुके हैं।

क्या आपको वह समय याद है जब कैंसर का टीका साइंस फिक्शन की कल्पनाओं में हुआ करता था? दिनोंदिन हम इस लक्ष्य के करीब जा रहे  हैं। दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिक इस विनाशकारी बीमारी को खत्म करने की कोशिशों में जुटे हैं।

इस बीमारी के इलाज और इससे निदान के लिए सभी देश अपने संसाधनों को साझा कर रहे हैं। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमाग इस लक्ष्य को पाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

संयुक्त राज्य और क्यूबा के बीच विकसित हो रहे संबंध इस बात के प्रमाण हैं। अमेरिका और क्यूबा के बीच हुआ एक नया समझौता अपने आपमें एक आश्चर्यजनक न्यूज है।

फेफड़ों के कैंसर के लिए विकसित हुए कैंसर के पहले टीके को बनाने के इरादे से दोनों देशों ने जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है। बता दें कि क्यूबा के डॉक्टरों ने पहले ही इसे बनाने की कामयाबी हासिल कर ली है।

हालांकि, यह कोई रोग निवारक औषिधि नहीं है। यह फेफड़े का कैंसर बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। इससे बीमारी चरम पर पहुँचने के बजाय क्रोनिक हो जाती है। मरीज बीमारी के साथ लम्बी ज़िन्दगी की मोहलत पा लेता है।

इस टीके से कीमोथेरेपी और रेडिएशन की जरूरत नहीं रह जायेगी। इससे कैंसर के सबसे खराब पहलू से बचा जा सकेगा। हालांकि विज्ञान और चिकित्सा टेक्नीक में तरक्की के साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिएशन पहले के मुकाबले अब अधिक सहनयोग्य हैं, फिर भी ये कैंसर से निपटने के सबसे कठिन पहलुओं में से हैं।

अपने आपमें आश्चर्य है फेफड़ों के कैंसर का टीका

फेफड़ों के कैंसर का टीका

प्रोजेक्ट के निर्देशक फर्नांडो रॉसबर्ग के अनुसार, यह टीका कई नए फायदे देगा।

सभी तरह के टयूमर की एक ख़ास विशेषता होती है। उनमे एक अणु होता है जो उनके विकास के लिए आवश्यक है। फेफड़ों के कैंसर का टीका इसके खिलाफ काम करता है, कैंसर को आगे विकसित होने से रोकता है।

यह टीका इस बीमारी से पीड़ित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगा। जो भी व्यक्ति कैंसर से पीड़ित है, वह सीधे या परोक्ष रूप से जानता है कि यह टीका कितना महत्वपूर्ण है।

जब रोग चरम सीमा तक पहुंचता है, तो मरीज के जीवन की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती है। इस हद तक कि कि कुछ लोग इलाज बंद कर देने का विकल्प चुनते हैं।

क्यूबा पहले से ही अपने नागरिकों को कैंसर का टीका उपलब्ध करा रहा है। विदेशियों के लिए, वहां राजनीति चीजों को जटिल बना देती है, लेकिन फिर भी दूसरे देश के लोगों के लिए इस इलाज को अभी तक ले पाना संभव है।

इसके लिए पहला कदम है क्यूबा की हेल्थ सर्विस सिस्टम में घुसने के लिए सर्वव्यापी संपर्क साधना।

दुनिया का पहला कैंसर का टीका

फेफड़ों के कैंसर का टीका एक चमत्कार

 

क्यूबा के साथ संबंधों की जटिलताओं के बावजूद कैंसर का  टीका पहले से ही पेरू और पैराग्वे में उपलब्ध है।

यूरोप भी कई क्लिनिकल ट्रायल में इसका उपयोग कर रहा है, हालांकि यह बहुत ही महंगा है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में टीका उपलब्ध हो पाने में 3 या 4 साल तक का समय लगता है। इस बीच क्यूबा के डॉक्टर विदेशी निवेशकों में इसके फाइनेंसर की तलाश में हैं।

इस मामले में, उसने दूसरी विश्व शक्तियों के साथ अपने संबंधों को खोल दिया है।

क्यूबा के मॉलिक्यूलर इम्युनोलॉजी सेंटर (सीएमआई) के एनर ब्लैंको ने पुष्टि की है कि क्यूबा में विदेशी निवेश करना नए कानूनों की वजह से बहुत आसान होगा।

नया कानून सीएमआई को दूसरे देशों के भागीदारों के साथ समझौतों करने की मंजूरी देता है। रिसर्च, उत्पादन या व्यावसायीकरण किसी भी चरण के के लिए कॉन्ट्रैक्ट किये जा सकते हैं।

मैरियल फ्री ट्रेड ज़ोन तक उनकी पहुंच भी होगी। यह इस द्वीप का बहुत बड़ा बंदरगाह है। इसे औद्योगिक विकास के लिए अलग रखा गया है।

उम्मीद की किरण, पहला कैंसर का टीका

इस तरह से इस इलाज के उपलब्ध होने से हजारों लोगों का जीवन बदल जाएगा

यह सिर्फ जिन्दा रहने की बात नहीं है। यह किसी लम्बी बीमारी की तमाम तकलीफों से गुजरने वाले लोगों की पीड़ा को झेलते हुए एक सम्मान भरे जीवन को बनाए रखने की बात में है। कैंसर का पता लगने के बाद जीवन की गुणवत्ता अक्सर बहुत बुरी तरह प्रभावित होती है।

कैंसर का टीका क्यूबा

यह टीका बहुत सी खोजों को प्रेरणा देगा।

फेफड़ों के कैंसर का टीका बनाने में अपनाई गयी प्रक्रियाओं से वैज्ञानिक दूसरे अंगों के लिए भी ऐसे उपचार विकसित करने में सक्षम होंगे। इसलिए दुनिया के कई डॉक्टरों ने इस खबर पर उत्साह जताया है।
याद रखें, ऐसा अनुमान है कि 40% लोग अपने जीवनकाल में किसी न किसी प्रकार के कैंसर का शिकार होंगे। यह दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए इस ओर से डॉक्टर और मरीज दोनों की निराशा समझी जा सकती है। फेफड़ों के कैंसर के खिलाफ यह नया कैंसर का टीका ताजी हवा का झोंका बनकर आया है।

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